Tuesday, 12 April 2016

शांति की चादर ओढे सफेद पहाड़ों में

खिड़कियों से रोशनी ने झरना बंद कर दिया। सामने वाले पेड़ पर पँछियों ने चहचहाना छोड़ दिया। मैं सो गया था गहरी नींद में।
अचानक सालों बाद एक दिन मैं जग गया सुबह जल्दी। रोशनी झूमकर खिड़की से उतर आई। पँछियों ने मधुर गीत सुनाये।
मैं उठकर देखता रहा पहाड़ों को। सफेद चादर ओढे पहाड़ों को।
मुझे पता है कि एक दिन आयेगा जब मैं इस सुबह को जी रहा होऊंगा। पहाड़, जंगल, गाँव, चहचहाहट।


        (Photo: Sumer Singh Rathore)

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