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Wednesday, 13 April 2016

75 शब्दों का पिटारा- ज़िंदगी@75

हमारे पास बहुत सारे सपने और कहानियां हैं, हम समाज, व्यवस्था और अपने आस पास के बारे में सोचते हैं। उसको लिखते हैं। अब ज़िंदगी ठहरी छोटी सी और इस डिजिटल युग में किसी के पास वक्त भी नहीं है कि इतना कुछ पढे।
तो हमने सोचा क्यों ना आपको केवल 75 शब्दों में अपनी बातें सुनाई जाए। और इसके लिए हमने बनाया यह ब्लॉग जिंदगी@75।
Video (Ajay Kumar)
सुनो दोस्त, फीडबैक जरूर दीजिएगा। वही हमारा मेहनताना है।

Tuesday, 8 March 2016

पंडवानी@DU

70 साल की औरत और महाभारत के रण की घनघोर गर्जना सी आवाज। तीजन बाई होना उम्र को चुनौती देना है। संगीत की लय में पिरोया गया एकल नाट्य अभिनय रंगमंच को नया 'स्पेस' उपलब्ध कराता है। पंडवानी लोक है जहाँ गति प्रवाह और जिजीविषा है। पंडवानी अतीत की याद है साथ ही भविष्य का स्वप्न भी। पंडवानी छत्तीसगढ़ की एक साँस है जिसकी भागीदारी भारत के जीवन में है। लोक दिल्ली पहुँच गया है।

चित्र साभार : अविनाश द्विवेदी 

Saturday, 20 February 2016

मंटो@मंडी हाउस

टोबा टेक सिंह कहाँ हैं? 68 साल बाद भी यह सवाल लाखों 'इंसानों' के ख्याल में गूँज रहा है। विभाजन में लकीर होती है लेकिन दर्द इस बात का ज्यादा है कि हम उस लकीर पर खड़े नहीं हो सकते। हमें उसे आर करना होता है या पार। मंटो आज भी इस सवाल का जवाब ढूंढ रहा है कि मिलजुलकर रहने वालों का वह  जमीन-ए-आसमाँ कहाँ हैं जहाँ सूरज अँधेरे की बजाय उजाला देता है।
चित्र साभार : अजय कुमार 
 
 

Tuesday, 9 February 2016

कबीर@मंडी हाउस

आज कबीर आया था, नीरू और नीमा को पूछ रहा था। कह दूँ कि सभ्यता के सभ्य होने की प्रसव पीड़ा में दोनों मर गए। सभ्य होने की प्रक्रिया में नाजायज़ कुछ भी नहीं होना चाहिए। कबीर! आज भी मनुष्य से अधिक पवित्रता प्यारी है। तुम्हारा आना आज सौन्दर्य का विषय है, सत्य का नहीं क्यों कि आज सबका सत्य अलग है और मालिक भी। तुम्हारे जाने के बाद काशी ही मगहर हो गयी कबीर!
चित्र साभार : अजय कुमार 

Sunday, 31 January 2016

सूरज का सातवाँ घोड़ा@मंडी हाउस

सफ़ेद घोड़े की नाल से सुखी होता है भविष्य, माणिक मुल्ला की कहानियों में खोजते हैं हम अपनी दोपहर की आकांक्षाएँ, प्रेम का निर्धारित करते हैं आर्थिक मूल्य और पढना चाहते हैं उसे मैट्रिक के गणित की तरह, नैतिक विकृति से दूर रहने की कोशिश में हम परिष्कृत कायरता धारण कर लेते हैं मर गए हैं सूरज के छह सभी घोड़े, हमारे अंधेपन से सुर्योदय रुका हुआ है, इंतजार है सूरज के सातवें घोड़े का
(फोटो: सुमेर सिंह राठौड़)

Saturday, 23 January 2016

'मृच्छकटिकम् : प्रेम की शाश्वत गाथा

शूद्रक का नाटक 'मृच्छकटिकम्' पढ़ते हुए प्रेम की संवेदना से अभिभूत होना स्वाभाविक है आदर्श संपन्न धनहीन चारुदत्त और उदात्त विचारस्वामिनी गणिका वसंतसेना के मध्य प्रस्फुटित होता प्रेम आज भी पाठक को रोमांच से भर देता है त्याग और समर्पण की राह पर चलकर प्रेम मंजिल पर पहुंचता है प्रेम द्वन्द रचता है और सृष्टि खुबसूरत और गतिशील हो जाती है 'मृच्छकटिकम्’ के बहाने इतिहास में देख आया कि प्रेम शाश्वत है और सरल भी

Wednesday, 16 December 2015

दत्तानी का नाटक बस दत्तानी का नहीं

उम्मीदें हाथ से छूट जाती हैं। ख़त फड़फड़ाते हुए तेज़ हवा में उड़ जाता है। वक़्त भागता हुआ सामने से निकल जाता है। चाहे जितना पीछा कर लें उतनी रफ़्तार हममें कहाँ?
वो पीछे हम आगे बढ़ते हैं...
हमारे पास रह जाती हैं बस कुछ यादें। यादें जो सहारा बनती हैं जिंदगी का। पर हमेशा नहीं कई दफे यादें ही होती हैं जो दम भी घोंटने लगती हैं। बुरी यादें आसानी से पीछा नहीं छोड़ती।

(फोटो: सुमेर सिंह राठौड़)