नकल करके पास होने से फेल होना अच्छा
है। किसी बात पर चाहे दूसरे उसे गलत कहें, पर अपनी सच्ची बात पर कायम रहना चाहिए। दयालु
लोगों के साथ नम्रता और बुरे लोगों के साथ सख्ती से पेश आना चाहिए। दूसरों की बातें
सुनने के बाद उसमें से काम की चीजों का चुनाव उसे सीखना होगा। उसे खुद पर विश्वास होना
चाहिए और दूसरों पर भी। तभी वह एक अच्छा इंसान बन पाएगा।
नौकरी में ओहदे पर ध्यान
मत देना, यह तो पीर का मजार है। निगाह चढावे-चादर पर रखनी चाहिए। ऐसा काम ढूँढना जहाँ
कुछ ऊपरी आय हो। वेतन तो पूर्णमासी का चाँद है, जो एक दिन दिखाई देता है और घटते-घटते
लुप्त हो जाता है। ऊपरी आय बहता स्रोत है जिससे सदैव प्यास बुझती है। वेतन मनुष्य देता
है, इसी से उसमें वृध्दि नहीं होती। ऊपरी आमदनी ईश्वर देता है, इसी से उसकी बरकत होती
हैं।
एक टापू पर मैंने ऐसा जीव देखा जिसका
सिर मनुष्य का था और पीठ लोहे की। वह बिना रुके धरती को खा रहा था और समुद्र को पी
रहा था। मैंने पूछा, क्या तुम्हारी भूख कभी नहीं मिटी और प्यास कभी शान्त नहीं हुई?"
वह बोला, "मैं सन्तुष्ट हूँ। मैं
खाते-खाते और पीते-पीते थक चुका हूँ लेकिन मुझे डर है कि कल को खाने के लिए धरती और
पीने के लिए समन्दर नहीं बचेगा।"
हमारे पास बहुत सारे सपने
और कहानियां हैं, हम समाज, व्यवस्था और अपने आस पास के बारे में सोचते हैं। उसको
लिखते हैं। अब ज़िंदगी ठहरी छोटी सी और इस डिजिटल युग में किसी के पास वक्त भी
नहीं है कि इतना कुछ पढे।
तो हमने सोचा क्यों ना आपको
केवल 75 शब्दों में अपनी बातें सुनाई जाए। और इसके लिए हमने बनाया यह ब्लॉग जिंदगी@75।
Video (Ajay Kumar)
सुनो दोस्त, फीडबैक जरूर दीजिएगा।
वही हमारा मेहनताना है।