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Friday, 17 March 2017

पुत्र के शिक्षक को अब्राहम लिंकन का पत्र

सम्माननीय सर

नकल करके पास होने से फेल होना अच्छा है। किसी बात पर चाहे दूसरे उसे गलत कहें, पर अपनी सच्ची बात पर कायम रहना चाहिए। दयालु लोगों के साथ नम्रता और बुरे लोगों के साथ सख्ती से पेश आना चाहिए। दूसरों की बातें सुनने के बाद उसमें से काम की चीजों का चुनाव उसे सीखना होगा। उसे खुद पर विश्वास होना चाहिए और दूसरों पर भी। तभी वह एक अच्छा इंसान बन पाएगा।
P.C.-Peeyush Parmar

Friday, 4 November 2016

कलयुगी ज्ञान : नमक का दारोगा - प्रेमचंद

नौकरी में ओहदे पर ध्यान मत देना, यह तो पीर का मजार है। निगाह चढावे-चादर पर रखनी चाहिए। ऐसा काम ढूँढना जहाँ कुछ ऊपरी आय हो। वेतन तो पूर्णमासी का चाँद है, जो एक दिन दिखाई देता है और घटते-घटते लुप्त हो जाता है। ऊपरी आय बहता स्रोत है जिससे सदैव प्यास बुझती है। वेतन मनुष्य देता है, इसी से उसमें वृध्दि नहीं होती। ऊपरी आमदनी ईश्वर देता है, इसी से उसकी बरकत होती हैं।
P.C.-Peeyush Parmar

Thursday, 3 November 2016

पूंजीवादी - खलील ज़िब्रान

एक टापू पर मैंने ऐसा जीव देखा जिसका सिर मनुष्य का था और पीठ लोहे की। वह बिना रुके धरती को खा रहा था और समुद्र को पी रहा था। मैंने पूछा, क्या तुम्हारी भूख कभी नहीं मिटी और प्यास कभी शान्त नहीं हुई?"
वह बोला, "मैं सन्तुष्ट हूँ। मैं खाते-खाते और पीते-पीते थक चुका हूँ लेकिन मुझे डर है कि कल को खाने के लिए धरती और पीने के लिए समन्दर नहीं बचेगा।"
PC : PEEYUSH PARMAR

Wednesday, 13 April 2016

75 शब्दों का पिटारा- ज़िंदगी@75

हमारे पास बहुत सारे सपने और कहानियां हैं, हम समाज, व्यवस्था और अपने आस पास के बारे में सोचते हैं। उसको लिखते हैं। अब ज़िंदगी ठहरी छोटी सी और इस डिजिटल युग में किसी के पास वक्त भी नहीं है कि इतना कुछ पढे।
तो हमने सोचा क्यों ना आपको केवल 75 शब्दों में अपनी बातें सुनाई जाए। और इसके लिए हमने बनाया यह ब्लॉग जिंदगी@75।
Video (Ajay Kumar)
सुनो दोस्त, फीडबैक जरूर दीजिएगा। वही हमारा मेहनताना है।