Friday, 18 December 2015

ठोकर जो लगी

ठोकरें हमें सिखाती है। कईं बार हम कुछ चीज़ों को अपने मन से ही अच्छा मानकर उनका अनुसरण करने लगते है। लेकिन जब वो अपना असली रंग दिखाती है तब मालूम होता है कि हम कितने गलत थे।
अगर एक ठोकर में संभल जाते है तब हमें सही गलत की पहचान भी होने लगती है। अगर हम ठोकर के बाद भी नहीं संभलते है फिर धंसते जाते है गहरे दलदल में। और डूब जाते है।

(फोटो: सुमेर सिंह राठौड़)

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