Monday, 11 July 2016

हवा में हिलता अस्तित्व

जहाज में आवाज का नामोनिशान नहीं था। अंदर आदमी थे पर बनावटी चुप्पी से सने हुए और बाहर सफ़ेद बादल जो आत्मा के साथ बकबक किये जा रहे थे। जमीन का आँखों के सामने न होना भयावह था और आसमान का और दूर होना दुखद। हवा गति देती है और अस्तित्व भी। जमीन स्पर्श देती है और सहारा भी। हवा में अस्तित्व की तलाश आसान लगती है। हम त्रिशंकु की भूमिका में आत्मविश्लेषण करते हैं।
PC : Peeyush 

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